बलरामपुर: जांच में यूरिया अधिक दाम पर बिक्री का खुलासा मैसर्स यादव ट्रेडर्स का उर्वरक लाइसेंस तत्काल निरस्त

बलरामपुर: जांच में यूरिया अधिक दाम पर बिक्री का खुलासा मैसर्स यादव ट्रेडर्स का उर्वरक लाइसेंस तत्काल निरस्त

बलरामपुर (भा.सं.)। जिलाधिकारी डॉ विपिन कुमार जैन के निर्देश पर किसानों को निर्धारित दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने एवं वितरण में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन व कृषि विभाग द्वारा लगातार निरीक्षण किए जा रहे हैं। इसी क्रम में जिला कृषि अधिकारी उपेन्द्र नाथ खरवार के नेतृत्व में रविवार को विकास खण्ड गैण्डास बुजुर्ग के ग्राम जनकपुर बैरियर स्थित मैसर्स यादव ट्रेडर्स पर औचक निरीक्षण किया गया जहाँ यूरिया निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बेचने की शिकायत का खुलासा हुआ।

निरीक्षण टीम के पहुंचने पर प्रतिष्ठान संचालक एवं प्रोपराइटर मुकेश कुमार यादव दुकान बंद कर मौके से फरार हो गए जिससे स्टॉक, पीओएस मशीन व विक्रय अभिलेखों की तत्काल जाँच संभव नहीं हो पाई। मौके पर मौजूद कृषकों से पूछताछ में ग्राम बसन्तपुर निवासी कृषक मुकेश कुमार यादव ने बताया कि उन्होंने एक बोरी यूरिया व एक किलोग्राम जिंक के लिए कुल ₹400 दिए, जिससे स्पष्ट हुआ कि यूरिया निर्धारित दर से महंगा बेचा जा रहा था और संगत उत्पाद जबरन थमाने का दबाव बनाया जा रहा था।

  कृषि विभाग ने प्रतिष्ठान पर निरीक्षण से बचने के लिए दुकान बंद कर भागने, अभिलेख प्रस्तुत न करने, निर्धारित दर से अधिक मूल्य वसूलने तथा उर्वरक के साथ अन्य उत्पाद जबरन बेचने जैसी कड़ियाँ गंभीर अनियमितताएँ पाईं। इन तथ्याओं के आधार पर जिला कृषि अधिकारी उपेन्द्र नाथ खरवार ने मैसर्स यादव ट्रेडर्स, जनकपुर बैरियर (विकास खण्ड गैण्डास बुजुर्ग) का उर्वरक विक्रय प्राधिकार पत्र/लाइसेंस कार्यालय आदेश संख्या-313 दिनांक 27 जुलाई 2026 के माध्यम से तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया।

 जिलाधिकारी व जिला कृषि अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि किसानों से निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली, कालाबाजारी या अन्य अनियमितताएँ पाए जाने पर संबंधित विक्रेताओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। जनपद के सभी विक्रय केंद्रों व सहकारी समितियों का नियमित व औचक निरीक्षण जारी रखने का निर्देश दिया गया है।

  किसानों से अपील की गई है कि उर्वरक खरीदते समय अनिवार्य रूप से रसीद लें और यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमित मांग का सामना करें तो तुरंत कृषि विभाग या जिला प्रशासन को सूचित करें शिकायत प्रमाणित होने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।