बलरामपुर: खरीफ की उन्नत उत्पादन तकनीक पर प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न

बलरामपुर: खरीफ की उन्नत उत्पादन तकनीक पर प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न

पचपेड़वा ,बलरामपुर(भा . सं.)। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, अयोध्या के कृषि विज्ञान केंद्र पचपेड़वा बलरामपुर में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (पूसा, नई दिल्ली) के अंतर्गत संचालित परियोजना अनुसूचित जाति उप योजना के तहत खरीफ फसलों की उन्नत उत्पादन तकनीक विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि जिला विकास प्रबंधक, नाबार्ड ब्रिजराज साहनी, नोडल अधिकारी व प्रधान वैज्ञानिक पूसा डॉ नफीस अहमद एवं केंद्र प्रभारी डॉ सियाराम कनौजिया ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

उदार प्रवचन व स्वागत

कार्यक्रम में आए मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथियों को अंग वस्त्र व पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया गया। उद्घाटन समारोह में प्रगतिशील कृषक अंगद प्रजापति व आर सी बौद्ध भी उपस्थित रहे।

प्रशिक्षण व तकनीकी जानकारी

केंद्र प्रभारी ने खरीफ में उगाई जाने वाली फसलों के बारे में जानकारी देते हुए विशेष रूप से धान की नर्सरी प्रबंधन और संबंधित कृषि क्रियाओं का विस्तृत ब्यौरा दिया। पूसा, नई दिल्ली के प्रधान वैज्ञानिक डॉ नफीस अहमद ने अनुसूचित जाति उप योजना के उद्देश्य एवं महत्व पर चर्चा करते हुए रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में जैव उर्वरक व हरी खाद अपनाने के लिए किसानों को प्रेरित किया गया।

स्मार्ट कृषि व रोजगार सृजन

मुख्य अतिथि ब्रिजराज साहनी ने स्मार्ट कृषि के लिए स्मार्ट मोबाइल के प्रयोग, बदलते मौसम में धान की सीधी बुवाई तकनीक और ऑर्गेनिक खेती पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बेरोजगार युवाओं और युवतियों को कृषि में रोजगार सृजन हेतु नाबार्ड की ओर से पूर्ण सहायता दी जाएगी।

सरकारी अभियान व संतुलित उर्वरक कार्यक्रम का संचालन कृषि प्रसार के वैज्ञानिक डॉ जय प्रकाश ने किया। उन्होंने सरकार के खेत बचाओ अभियान के तहत संतुलित उर्वरकों के उपयोग की आवश्यकता और विधियों पर प्रकाश डाला।

बीज वितरण व सहभागिता

कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद के लगभग 200 कृषकों को नरेन्द्र 2065 प्रजाति का बीज निःशुल्क वितरित किया गया। इस अवसर पर अनिल गौतम, प्रदीप गौतम, विद्यावती, गीता, राम चन्द्र भारती व जैसराम भारती सहित दर्जनों किसान उपस्थित रहे।

इस प्रशिक्षण का उद्देश्य क्षेत्रीय किसानों को आधुनिक व टिकाऊ उत्पादन तकनीकों से अवगत कराना तथा अनुसूचित जाति समुदाय के कृषकों को समर्पित सहायता व संसाधन उपलब्ध कराना है, जिससे स्थानीय कृषि उत्पादकता और रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो सके।