अमेरिकी हमलों में छह भारतीय नाविकों की मौत, भारत ने जताया कड़ा विरोध
ओमान तट के पास टैंकर पर हमले में तीन की गई जान
तेहरान (भा. सं)। ईरान युद्ध के बीच अमेरिकी हमलों में अब तक छह भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है। ताजा घटना में ओमान तट के पास एक टैंकर पर हुए अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई। भारत सरकार ने इस घटना पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए अमेरिका से जवाब मांगा है।
शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने पुष्टि की है कि हमले के बाद लापता तीनों भारतीय नाविकों के शव बरामद कर लिए गए हैं और उनकी पहचान कर ली गई है। भारत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अमेरिकी डिप्टी चीफ ऑफ मिशन को तलब कर विरोध दर्ज कराया है।
टैंकर पर हमले की अमेरिका ने दी सफाई
अमेरिका ने मोटर टैंकर ‘सेट्टेबेलो’ पर हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि जहाज ने आदेशों का पालन नहीं किया और घेराबंदी तोड़ने की कोशिश की। इसके बाद प्रिसिजन गाइडेड म्यूनिशन से जहाज के इंजन रूम को निशाना बनाया गया।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, पलाऊ के झंडे वाले इस जहाज पर सवार 21 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि तीन नाविक लापता थे, जिनकी अब मौत की पुष्टि हो चुकी है। भारत ने इस हमले को ‘बेहद चिंताजनक’ बताते हुए तनाव कम करने की अपील की है।
भारतीय नाविकों पर बढ़ता खतरा
भारतीय दूतावास ने बताया कि ओमान के शिनास बंदरगाह के पास हुई इस घटना पर नजर रखी जा रही है और स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है। समुद्री क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय नाविकों की मौजूदगी के कारण खतरा अभी भी बना हुआ है।
वैश्विक समुद्री क्षेत्र में अहम भूमिका
भारत दुनिया में नाविकों के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ताओं में से एक है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में तीन लाख से अधिक भारतीय समुद्री क्षेत्र में कार्यरत हैं। वैश्विक समुद्री कर्मचारियों में भारतीयों की हिस्सेदारी लगभग 10 से 12 प्रतिशत है।
भारतीय नाविक कैप्टन, नेविगेशन ऑफिसर, मरीन इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हैं और कच्चे तेल, गैस, अनाज सहित विभिन्न वस्तुओं के वैश्विक परिवहन में अहम भूमिका निभाते हैं। विश्व व्यापार का करीब 90 से 95 प्रतिशत हिस्सा समुद्री मार्गों से होता है, जिससे इस क्षेत्र का महत्व और बढ़ जाता है।
Bhartiya Samvad