सोनीपत(भा.सं.) । उपमण्डल अधिकारी(ना०) एवं क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) सुभाष चंद्र ने केंद्र सरकार द्वारा सडक़ दुर्घटना में घायल व्यक्तियों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पीएम राहत योजना शुरू की गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सडक़ दुर्घटना पीडि़तों को गोल्डन ऑवर के दौरान त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों के अनुसार सडक़ दुर्घटनाओं में होने वाली लगभग 50 प्रतिशत मौतों को समय पर उपचार उपलब्ध कराकर रोका जा सकता है।
केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव महमूद अहमद ने बुधवार को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से प्रधानमंत्री राहत (सडक़ दुर्घटना पीडि़त अस्पताल भर्ती एवं सुनिश्चित उपचार) योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक की और अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग अथवा शहरी सडक़ों सहित किसी भी सडक़ पर दुर्घटना का शिकार हुए व्यक्ति को पहले सात दिनों के लिए प्रति व्यक्ति अधिकतम 01 लाख 50 लाख हजार रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।
एसडीएम ने कहा कि इस योजना का लाभ प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएमजेएवाई) पर सूचीबद्घ अस्पतालों में ईलाज के दौरान मिलता है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे पीएमजेवाई पर सूचीबद्घ अस्पतालों की बैठक कर उन्हें निर्देश दिए कि अगर सडक़ दुर्घटना का पीडि़त व्यक्ति उनके अस्पताल में लाया जाता है तो उसका तुरंत ईलाज करें। अगर इस दौरान किसी प्रकार की लापरवाही की जाती है तो संबंधित अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने पुलिस विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जब भी सडक़ दुर्घटना को लेकर आपने पास सूचना आती है तो दुर्घटना में पीडि़त व्यक्ति का सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के ई-डीएआर (इलेक्ट्रॉनिक विस्तृत दुर्घटना प्रतिवेदन) पोर्टल तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के ट्रांजेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम पर रजिस्ट्रेशन करें ताकि उसे इस योजना का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि यह योजना अत्याधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित की जाती है, जिसमें दुर्घटना की सूचना मिलने से लेकर अस्पतालों के भुगतान और दावों के निपटान तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होती है।
एसडीएम ने बताया कि पीएम राहत योजना के अंतर्गत अस्पतालों को उपचार व्यय का भुगतान मोटर वाहन दुर्घटना कोष (एमवीएएफ) के माध्यम से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि योजना को इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम (डायल-112) से भी जोड़ा गया है, जिससे कोई भी व्यक्ति, चाहे वह पीडि़त हो अथवा गुड सेमेरिटन, तुरंत एंबुलेंस सेवा प्राप्त कर सकेगा तथा निकटतम सूचीबद्घ अस्पताल की जानकारी हासिल कर सकेगा।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन सडक़ सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि सडक़ दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को समय पर उपचार उपलब्ध हो सके और बहुमूल्य जीवन बचाए जा सकें। इस मौके पर एसीपी जसपाल सिंह, डिप्टी सीएमओ गिन्नी लांबा, आरटीए विभाग मोटर व्हीकल ऑफिसर सचिन ढूल व ट्रांसपोर्ट इंस्पेक्टर दीपक सरोहा सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।