सोनीपत के असन्यारपुर तिहाड़ कला गांव में गौसेवा की अनूठी मिसाल, पूरे सम्मान के साथ किया अंतिम संस्कार

सोनीपत के असन्यारपुर तिहाड़ कला गांव में गौसेवा की अनूठी मिसाल, पूरे सम्मान के साथ किया अंतिम संस्कार

सोनीपत( भा. सं.)। जिले के असन्यारपुर तिहाड़ कला गांव में गौसेवा और संवेदनाओं की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली। यहां एक परिवार ने अपनी 18 वर्षीय गौमाता 'नंदिनी' के गोलोक गमन के बाद पूरे धार्मिक रीति-रिवाज और सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया। परिवार के लिए नंदिनी केवल एक पशु नहीं, बल्कि घर का अभिन्न सदस्य थी।

आषाढ़ मास की सप्तमी को नंदिनी ने अंतिम सांस ली। इसके बाद उसके पार्थिव शरीर को गुलाब के फूलों से सजाकर अंतिम विदाई दी गई। सनातन परंपरा के अनुसार समाधि देते समय 31 किलो नमक डालकर मिट्टी दी गई। इस दौरान परिवार के सदस्य और गांव के कई लोग भावुक हो उठे।

परिवार ने बताया कि नंदिनी ने वर्षों तक दूध, घी और छाछ देकर परिवार की सेवा की। अपने जीवनकाल में उसने 12 बार बछड़ों को जन्म दिया और उसकी कई पीढ़ियां आज भी परिवार के पास हैं। इसी वजह से उसके निधन का दुख किसी अपने सदस्य को खोने जैसा है।

परिवार ने कहा कि पूर्वजों से चली आ रही गौसेवा और गौरक्षा की परंपरा आगे भी पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ जारी रहेगी। ग्रामीणों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए इसे इंसान और गौमाता के बीच प्रेम, सेवा और सम्मान के रिश्ते की प्रेरणादायक मिसाल बताया। यह भावुक घटना अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।