हैलट में हाईटेक मैटरनल विंग
कानपुर, (भा. सं) । जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के हैलट अस्पताल से सम्बंद्ध स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग अब हाईटेक बनने जा रहा है। अस्पताल का ‘मैटरनल चाइल्ड विंग’, जो कोरोना काल के बाद से बदहाल स्थिति में पहुंच गया था, अब उसका पूरी तरह से कायाकल्प होने जा रहा है। अगले तीन महीनों में यह विंग कॉरपोरेट हॉस्पिटलों की तर्ज पर पूरी तरह हाईटेक और फुल्ली एयर-कंडीशन बन कर तैयार हो जाएगा। यह पूरा प्रोजेक्ट पर करीब 80 लाख रुपए की से बनेगा। इसमें खास बात यह है कि इस नए विंग में मरीजों को वीआईपी सुविधाएं मिलेंगी, वो भी बिल्कुल मुफ्त। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि यह विंग मूल रूप से गर्भवती महिलाओं और बच्चों के इलाज के लिए ही बना था। लेकिन जब कोरोना महामारी आई, तो इस बिल्डिंग का इस्तेमाल करीब दो साल तक लगातार कोविड मरीजों को रखने के लिए किया गया। उस दौरान संक्रमण रोकने के लिए यहां रसायनों का भारी छिड़काव होता था। लगातार छिड़काव की वजह से बिल्डिंग की हालत बेहद खस्ता हो गई थी। जगह-जगह जंग लग गया था और टाइल्स टूट गई थीं। अब इसे पूरी तरह रिनोवेट किया जा रहा है।
जरूरत पड़ते ही बन जाएगा ऑपरेशन टेबल
इस नए विंग की सबसे बड़ी खासियत यहां मिलने वाले आधुनिक बेड्स होंगे। कॉलेज को दान में 10 ऐसे खास बेड मिल रहे हैं, जो जरूरत पड़ने पर तुरंत ही ओटी (ऑपरेशन थिएटर) टेबल में बदल जाएंगे। यानी अगर कोई गर्भवती महिला बेड पर है और अचानक उसे लेबर पेन शुरू होता है, तो उसे दूसरे कमरे या ओटी में शिफ्ट करने की झंझट नहीं होगी। उसी बेड को तत्काल ऑपरेशन टेबल बना दिया जाएगा। इससे मरीज को होने वाली तकलीफ और समय दोनों की बचत होगी।
कूलर के भरोसे कटते थे दिन, अब मिलेंगे सेपरेट ।एसी
डॉ. संजय काला ने बताया कि,पहले अस्पताल के लेबर रूम में एसी की सुविधा नहीं थी। भीषण गर्मी में भी गर्भवती महिलाओं को कूलर के भरोसे रहना पड़ता था, लेकिन अब पूरा वॉर्ड और लेबर रूम सेंट्रलाइज्ड एसी होगा। यहां का फर्नीचर और मेडिकल इक्विपमेंट (उपकरण) बेहद हाई-एंड यानी आधुनिक होंगे। अस्पताल प्रशासन का मुख्य फोकस नॉर्मल डिलीवरी को बढ़ावा देना है, ताकि महिलाओं को अवांछित सिजेरियन (ऑपरेशन) से बचाया जा सके। गंभीर मरीजों के लिए 8 बेड का आईसीयू /(एचडीयू) बनेगा ताकि कई बार डिलीवरी के दौरान या उसके बाद महिला या नवजात बच्चे की स्थिति नाजुक हो जाती है। ऐसे सीरियस मरीजों को संभालने के लिए इसी विंग के अंदर 8 बेड का एक हाई-डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) यानी स्पेशल आईसीयू बनाया जा रहा है।
प्री और पोस्ट-लेबर मरीजों के लिए अलग से बनेगा मॉडर्न रूम्स
प्राचार्य प्रो. डॉ संजय काला ने बताया कि प्री-लेबर और पोस्ट-लेबर मरीजों के लिए अलग से मॉडर्न रूम्स बनाए जा रहे हैं। 3 महीने का इंतजार, डोनेशन से मिला लाखों का फर्नीचर इस हाईटेक विंग को तैयार होने में लगभग तीन महीने का समय लगेगा। हालांकि इस प्रोजेक्ट की कुल लागत लगभग 80 लाख रुपए आ रही है, लेकिन अस्पताल पर इसका पूरा वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। विंग के लिए लगने वाले कई महंगे बेड्स और आलीशान फर्नीचर अस्पताल को डोनेशन (दान) के जरिए मिल रहे हैं। इसके शुरू होने से कानपुर और आस-पास के जिलों से आने वाली लाखों गर्भवती महिलाओं को सीधे तौर पर बड़ी राहत मिलेगी।
Bhartiya Samvad Desk 5