लखीमपुर खीरी : देवकली मंदिर में प्रेमी जोड़े को पूजा से रोकने पर विवाद
पौराणिक देवकली मंदिर में बाबा राजेश गिरी की दबंगई, प्रेमी जोड़े को पूजा करने से रोका;
भगवान से ऊंचे आसन पर जमे महंत बोले 7 पुश्तों से मंदिर पर श्रद्धालुओं मे आक्रोश
लखीमपुर खीरी (भा. सं.) । थाना फरधान क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले प्रसिद्ध पौराणिक तीर्थ स्थल *देवकली देवेश्वर नाथ मंदिर* में बाबा राजेश गिरी की तानाशाही का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। मंदिर में दर्शन और पूजन करने आए एक बालिक (वयस्क) प्रेमी जोड़े को महंत राजेश गिरी ने अपनी मनमानी चलाते हुए न सिर्फ पूजा करने से साफ मना कर दिया, बल्कि उन्हें मंदिर परिसर से बाहर का रास्ता दिखा दिया। भारत का संविधान जहां हर बालिक नागरिक को अपनी पसंद से जीने और धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है, वहीं बाबा के इस अड़ियल और गैर-कानूनी रवैए के कारण उस प्रेमी जोड़े को मंदिर से निराश होकर वापस लौटना पड़ा।
इस पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ा और संवेदनशील मुद्दा मंदिर के भीतर की मर्यादा को लेकर उठ रहा है। पौराणिक महत्व रखने वाले साक्षात भगवान भोलेनाथ का विग्रह (मूर्ति) जहां नीचे स्थापित है, वहीं उनके ठीक सामने मंदिर के महंत बाबा राजेश गिरी स्वयं तख्त डालकर भगवान से भी ऊंचे आसन पर विराजमान रहते हैं। हिंदू समाज, सनातन परंपरा और शास्त्रों में भगवान से ऊंचे स्थान पर बैठना सर्वथा गलत और आस्था का खुला अपमान माना गया है। खुद को भगवान से ऊपर दिखाने की बाबा की यह तस्वीर अब क्षेत्र में चर्चा और श्रद्धालुओं के बीच भारी आक्रोश का विषय बन चुकी है।
जब स्थानीय पत्रकार ने बालिक जोड़े को रोकने और इस व्यवस्था पर बाबा से सवाल पूछा, तो उन्होंने देश के कानून को ठेंगा दिखाते हुए अहंकारपूर्वक कहा कि, "यह मंदिर हमारी सात पुश्तों से हमारे आधिपत्य में है, यहाँ देश का संविधान नहीं बल्कि हमारा नियम लागू होता है।" योगी सरकार द्वारा इस ऐतिहासिक तीर्थ स्थल के सौंदर्यीकरण के लिए करोड़ों रुपए का बजट दिया गया है, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर माहौल मिल सके। लेकिन सरकारी पैसे से चमके इस धाम को बाबा अपनी निजी जागीर समझकर चला रहे हैं।
सनातन मर्यादाओं को ताक पर रखने और देश के संविधान को सीधी चुनौती देने वाले इस महंत पर थाना फरधान पुलिस और जिला प्रशासन कब और क्या कार्रवाई करता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।
Bhartiya Samvad Desk 5