बलरामपुर: पंतनगर विश्वविद्यालय की विशेषज्ञ टीम ने कृषि विज्ञान केंद्र पचपेड़वा का निरीक्षण किया
पचपेड़वा, बलरामपुर (भा.सं.)। उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार), लखनऊ द्वारा संचालित परियोजना "किसानों की आय बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश में कृषि के लिए बेहतर कृषि तकनीकों का हस्तक्षेप के तहत गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर की एक विशिष्ट टीम ने कृषि विज्ञान केंद्र, पचपेड़वा का निरीक्षण किया।
टीम में प्रो डॉ बी.डी. भुज, प्रो डॉ रंजन श्रीवास्तव, प्रो डॉ सतीश चंद्र, परियोजना प्रमुख विशेषज्ञ डॉ बी.वी.एस. शिशोदिया (से.नि.), आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज से जुड़े सदस्य तथा उप महानिदेशक डॉ सुशील कुमार सिंह और तकनीकी सचिव डॉ हिमांशु तिवारी शामिल थे।
कृषि विज्ञान केंद्र, पचपेड़वा के प्रभारी अधिकारी डॉ सियाराम ने आगन्तुकों का स्वागत किया और केंद्र की गतिविधियों का संक्षेप में परिचय दिया। इसके बाद प्रसार वैज्ञानिक डॉ जय प्रकाश ने परियोजना के तहत चयनित ग्राम मनोहरापुर, नारायणपुर जुड़वानिया एवं खजुरिया (विकास खंड पचपेड़वा) में अब तक किए गए कार्यों का विस्तृत पॉवरपॉइंट प्रस्तुतीकरण प्रस्तुत किया।
प्रस्तुतीकरण में कार्यान्वित तकनीकें, फसल प्रबंधन के तरीके, प्रशिक्षण कार्यक्रमों के संचालन व किसानों पर उनके प्रभाव के आँकड़े दर्शाए गए। परियोजना के प्रमुख विशेषज्ञों और समिति सदस्यों ने प्रक्षेत्र सहायक संतराम द्वारा संकलित सर्वे अभिलेखों की गहनता से जाँच की और मैदान में किए गए क्रियात्मक कार्यों व प्राप्त परिणामों का मूल्यांकन किया। निरीक्षण के दौरान समिति ने परियोजना के समेकन और बेहतर प्रभाव हेतु कई महत्वपूर्ण सुझाव दिये।
इनमें प्रशिक्षण मॉड्यूलों का स्थानीय भाषा में सरलीकरण, प्रदर्शन स्थलों पर किसानों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के उपाय, जल-प्रबंधन व वातावरण अनुकूल कृषि तकनीकों का व्यापक प्रचार तथा अभिलेख-प्रणाली में पारदर्शिता व नियमित अद्यतन शामिल हैं। सदस्यों ने कहा कि ये सुझाव आगामी कार्यक्रमों व गतिविधियों में समायोजित किए जाएंगे, ताकि परियोजना का लाभ अधिकतम किसानों तक पहुंचे और उनकी आय में वास्तविक वृद्धि हो सके।
निरीक्षण के समापन पर आगन्तुकों ने कहा कि इस प्रकार के क्षेत्रीय निरीक्षण परियोजना के क्रियान्वयन की गुणवत्ता जांचने तथा ज़मीनी स्तर पर आवश्यक सुधार किए जाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। साथ ही उन्होंने केंद्र के वैज्ञानिकों व स्थानीय कार्यकर्ताओं के योगदान की सराहना की और आगे सहयोग जारी रखने का आश्वासन दिया।
मसरूर अली