सोनीपत : स्नान को निकले पिता, बेटे और भांजे की सड़क हादसे में मौत - रामपुर गांव में पसरा मातम

सोनीपत : स्नान को निकले पिता, बेटे और भांजे की सड़क हादसे में मौत - रामपुर गांव में पसरा मातम

सोनीपत /खरखोदा (भा. सं) ।हरिद्वार स्नान के लिए निकले रामपुर गांव के एक परिवार पर शनिवार को ऐसा दुखों का पहाड़ टूटा, जिसने पूरे गांव को गमगीन कर दिया। गांव निवासी संदीप, उसका 5 वर्षीय पुत्र वंश और भांजा नरेंद्र सड़क हादसे का शिकार हो गए। हादसे में तीनों की मौके पर ही मौत हो गई।

 जानकारी के अनुसार संदीप अपने पुत्र वंश और भांजे नरेंद्र के साथ मोटरसाइकिल पर हरिद्वार स्नान के लिए जा रहा था। जैसे ही वे मुजफ्फरनगर-शामली बाईपास के पास पहुंचे, एक तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि तीनों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।

हादसे की सूचना जैसे ही रामपुर गांव पहुंची, पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों के अनुसार संदीप गांव में एक छोटी नाई (बार्बर) की दुकान चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। परिवार की आर्थिक स्थिति भी अधिक मजबूत नहीं थी।

संदीप अपने पीछे पत्नी, तीन बेटियों और एक बेटे का परिवार छोड़ गया है। इनमें एक बेटी की शादी हो चुकी है, जबकि दो बेटियां अभी अविवाहित हैं। हादसे में संदीप के इकलौते पुत्र वंश की भी मौत हो गई, जिससे परिवार को दोहरा आघात लगा है।

वहीं मृतक नरेंद्र भी अपने परिवार का इकलौता बेटा था। उसकी दो बहनें हैं। नरेंद्र की मौत से उसकी मां और पूरे परिवार पर भी दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। एक ही हादसे ने भाई-बहन दोनों परिवारों की खुशियां छीन ली हैं।

गांव के पूर्व सरपंच नरेश ने सरकार और प्रशासन से दोनों प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि हादसे ने दो परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है और ऐसे समय में सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए मदद के लिए आगे आना चाहिए। ग्रामीण स्तर पर भी दोनों परिवारों की सहायता के प्रयास किए जाएंगे।

बताया गया है कि गांव के रोहित सहित अन्य ग्रामीण मुजफ्फरनगर पहुंचे हुए हैं और पुलिस कार्रवाई की निगरानी कर रहे हैं, ताकि दुर्घटना के जिम्मेदार वाहन चालक के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके तथा मृतकों के शवों को जल्द गांव लाया जा सके।

गांव में हर कोई इस दर्दनाक हादसे से स्तब्ध है। लोगों का कहना है कि एक ही पल में दो परिवारों के सपने उजड़ गए और अब उन्हें समाज तथा प्रशासन के सहयोग की आवश्यकता है।

सुनील कुमार/भा. सं.