कौन हैं कृष्ण मोहन? जिन्हें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का कार्यवाहक महामंत्री बनाया गया

कौन हैं कृष्ण मोहन? जिन्हें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का कार्यवाहक महामंत्री बनाया गया

अयोध्या (भा. सं.)। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने वरिष्ठ संघ पदाधिकारी एवं भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी कृष्ण मोहन को ट्रस्ट का कार्यवाहक महामंत्री नियुक्त किया है। ट्रस्ट में हुए प्रशासनिक फेरबदल के तहत उन्हें यह महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया है। उनकी नियुक्ति को ट्रस्ट के प्रशासनिक और संगठनात्मक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

हरदोई के मूल निवासी हैं कृष्ण मोहन

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के मूल निवासी कृष्ण मोहन लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े रहे हैं। उन्होंने पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र संघचालक के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई है। संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका और नेतृत्व क्षमता के कारण उन्हें संघ के वरिष्ठ एवं अनुभवी पदाधिकारियों में गिना जाता है।

प्रशासनिक सेवा का लंबा अनुभव

कृष्ण मोहन भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए प्रभावी प्रशासन और बेहतर समन्वय का परिचय दिया। यही अनुभव अब उन्हें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की नई जिम्मेदारी निभाने में सहायक माना जा रहा है।

2025 में बने थे ट्रस्ट के सदस्य

वर्ष 2025 में कृष्ण मोहन को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया था। उन्होंने ट्रस्ट में कामेश्वर चौपाल का स्थान लिया था। सदस्य बनने के बाद से वे राम मंदिर से जुड़े विभिन्न प्रशासनिक एवं विकास कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।

राम मंदिर आंदोलन से रहा गहरा जुड़ाव

कृष्ण मोहन का राम मंदिर आंदोलन और संगठनात्मक गतिविधियों से लंबे समय से जुड़ाव रहा है। उन्हें प्रशासनिक दक्षता, संगठन कौशल और बेहतर समन्वय क्षमता के लिए जाना जाता है। इन्हीं विशेषताओं को देखते हुए ट्रस्ट ने उन्हें कार्यवाहक महामंत्री का दायित्व सौंपा है।

ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों का मानना है कि कृष्ण मोहन के अनुभव और नेतृत्व से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रशासनिक कार्यों को नई गति मिलेगी तथा मंदिर से संबंधित योजनाओं और व्यवस्थाओं का संचालन और अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।