कानपुर: काव्योत्सव में गूंजे संवेदनाओं के स्वर

कानपुर: काव्योत्सव में गूंजे संवेदनाओं के स्वर

कानपुर (भा. सं.)। मां सरस्वती देवी स्मृति साहित्य संस्थान, द्वारा आयोजित काव्योत्सव में पारिवारिक संदर्भों की रचनाये प्रस्तुत कर वातावरण को संवेदनशील बना दिया। काव्योत्सव की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि श्री अशोक शास्त्री ने एवं संचालन राजेश सिंह ने किया।मुख्यतिथि के रूप में राकेश राठौर उपस्थित रहे। काव्योत्सव का शुभारंभ कवि राजेन्द्र अवस्थी की सरस्वती वंदना से हुआ।
   सुपरिचित कवयित्री शिवा प्रभारन ने अपनी रचना साथ में चलती हवायें,भी जान लेती हैं,मन की दशाएँ, जुबां की मुस्कुराहट प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी। वरिष्ठ कवि अशोक शास्त्री ने मां पर अपनी रचना जाने कैसे पढ़ लेती थी मेरी गहन उदासी इसी वजह से रह जाती थी उस दिन भूखी प्यासी पढ़ कर खूब तालियां बटोरीं। कवि राजेन्द्र अवस्थी ने  अपनी रचना हमतो ढूंढ रहेन है गांव आपन ढूंढ हैं गांव। जेठ महीना की भरी दुपहरी अम्मा नंगे पांव हमतो ढूंढ रहेन हैं गांव पढ़ कर ग्राम्य जीवन के पुराने वैभव व यादों को रेखांकित किया। कवि राजेश सिंह   ने बेटी पर अपनी रचना बेटी अगर नहीं होती तो यह संसार नहीं होता  रक्षाबंधन भैयादूज का त्यौहार नहीं होता पढ़ कर वातावरण को संवेदनशील बना दिया।
  कवयित्री अनिता बृजेश ने अपनी   रचना मां की समर्पित की उनकी पंक्तियां माता है अनमोल खजाना सुनो जगत के प्यारे जन मां के बिना सूना सारा जग सूना है तन मन जीवन’।कवि अनुज मनमीत,शिव मूर्ति सिंह ने काव्यधारा को आगे बढ़ाया।’ इस अवसर पर शिवानी, शशि नेहा रोहित दिनेश, अविरल, आन्या, आद्या, गुनगुन,आदि लोग उपस्थित रहे।