आठ पोल कांड में जांच ठप: क्या बालमुकुंद गुप्ता पर अफसरों की मेहरबानी ?
क्या बालमुकुंद गुप्ता वाकई इतना पावर फुल है कि अधिकारी भी उनके आगे बेबस हैं या फिर पैसों का खेल चल रहा है विभाग के अंदर
अंबेडकरनगर(भा.स.)। जनपद में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मामला बेवाना पावर हाउस में तैनात आउटसोर्स निविदा कर्मी बालमुकुंद गुप्ता पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर गौहन्ना (मरैला उपकेंद्र) क्षेत्र में अवैध रूप से काम कराया।
चार पोल का स्टीमेट बनवाया गया, लेकिन मौके पर आठ पोल खड़ा कर दिए गए, और उस पर पुरानी ABC केबल लगाई गई। इससे विभाग को न केवल आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि यह खुला भ्रष्टाचार का उदाहरण बन गया।बिजली लाइन निर्माण के लिए लगाए गए पोलों के एस्टीमेट से जुड़ा है, जिसमें गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विभागीय कार्यवाही के दौरान लाइन निर्माण के लिए चार पोल का एस्टीमेट तैयार किया गया था, लेकिन मौके पर आठ पोल लगवाए गए। आरोप है कि संविदा कर्मचारी व लाइनमैन बालमुकुंद द्वारा चार अतिरिक्त पोल बिना कागजों मैं दर्शाये ही धनराशि अपने निजी के खाते में ट्रांसफर करवा ली गई।
इस मामले की जांच अकबरपुर मीटर एक्सियन के अधिकारी द्वारा शुरू की गई थी। शुरुआत में जब जांच शुरू हुई, तब गर्मी का मौसम था, लेकिन अब ठंड का मौसम आ गया है और जांच फाइलों में ही ठंडी पड़ती नजर आ रही है। मीडिया कर्मियों द्वारा कई बार फोन कर जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन हर बार व्यवस्था का हवाला देकर मामले को टाल दिया गया। अब स्थिति यह है कि संबंधित अधिकारी फोन तक रिसीव नहीं कर रहे हैं।
इस पूरे प्रकरण को लेकर क्षेत्र में चर्चा है, कि कहीं प्रभावशाली लाइनमैन बालमुकुंद के दबाव में जांच अधिकारी ने घुटने तो नहीं टेक दिए हैं, या फिर जांच भी किसी “लक्ष्मीनिया प्रभाव” से प्रभावित हो गई है। यदि ऐसा है, तो यह विभागीय पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
गौरतलब है कि बिजली विभाग का नाम आए दिन किसी न किसी विवाद या भ्रष्टाचार के मामले में सुर्खियों में बना रहता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदेश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन अंबेडकरनगर में बिजली विभाग की कार्यशैली उन दावों को चुनौती देती दिखाई दे रही है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इस तथाकथित “रामराज्य” में भ्रष्टाचार पर निष्पक्ष और निष्कलंक जांच संभव है, या फिर इसके लिए भगवान राम को स्वयं अवतार लेना पड़ेगा? जनता निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है।
Bhartiya Samvad